19 दिसंबर 2019 - 12:56
संशोधित नागरिकता कानून वापस लिया जाएः ह्यूमन राइट्स वॉच

मानवाधिकारों की वैश्विक संस्था ह्यूमन राइट्स वॉच ने भारत से संशोधित नागरिकता कानून वापस लिये जाने की मांग की है।

अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था ह्यूमन राइट्स वॉच ने भारत की केंद्र सरकार से नागरिकता संशोधन अधिनियम तत्काल वापस लेने का निवेदन किया है। ह्यूमन राइट्स वॉच ने साथ ही यह भी कहा है कि पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों व छात्रों पर किये गए अत्याचारों और दमन की भी जांच की जानी चाहिए।

अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था ह्यूमन राइट्स वॉच की दक्षिण एशिया निदेशक मिनाक्षी गांगगुली ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि इन प्रदर्शनों को देखकर कहा जा सकता है कि भारत सरकार मूल अधिकारों के हनन के ख़िलाफ़ नागरिकों के व्यापक विरोध को समझ नहीं पाई है। इन प्रदर्शनों का जवाब क़ानून को वापस लेना ही हो सकता है।  उन्होंने कहा कि कमज़ोर तबक़ों को डराने वाली नागरिकता सत्यापन की योजना को भी वापस लिया जाना चाहिए।

गांगुली ने कहा कि प्रदर्शन करना नागरिकों का बुनियादी अधिकार है। यह चिंता की बात है कि पुलिस, ग़ैर ज़रूरी और अत्याधिक बल का प्रयोग कर रही है।  उनका कहना था कि जामिया, एएमयू व उत्तरपूर्व में प्रदर्शनों के दौरान सरकार को पुलिसिंग के अंतर्राष्ट्रीय मानकों का पालन करना चाहिए और मानवाधिकारों के तय मानकों का ख्याल रखा जाना चाहिए।

इसी बीच दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में पुलिस कार्रवाई के विरोध में अब विदेशी विश्वविद्यालयों के छात्र भी उतर आए हैं। ऑक्सफोर्ड, हार्वर्ड, येल, एमआईटी, कोलंबिया, स्टैनफोर्ड और टफ्ट्स समेत दुनिया के कई प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों ने पुलिस कार्रवाई के खिलाफ प्रदर्शन किया। विदेशी विश्वविद्यालयों के परिसरों में प्रदर्शनों की अगुवाई वहां के भारतीय विद्यार्थियों ने की।विभिन्न विश्वविद्यालयों के 400 से अधिक छात्रों ने जामिया और एएमयू छात्रों के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए एक संयुक्त बयान जारी किया है। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों, शोधवेत्ताओं और पूर्व विद्यार्थियों की ओर से जारी संयुक्त बयान में कहा गया है, हम जामिया, एएमयू और अन्य भारतीय शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों पर की गई हिंसा की निंदा करते हैं। पुलिस बल का इस्तेमाल विश्वविद्यालय में प्रदर्शन करने के अपने मौलिक अधिकारों का इस्तेमाल कर रहे विद्यार्थियों के खिलाफ किया गया है।